शत्रु को मित्र बनाने के लिए

गरल सुधा रिपु करहि मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।

वर्षा की कामना की पूर्ति हेतु

सोइ जल अनल अनिल संघाता। होइ जलद जग जीवनदाता।।

लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए

जिमि सरिता सागर मंहु जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएं। धर्मशील पहिं जहि सुभाएं।।

धन सम्पत्ति की प्राप्ति हेतु

जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं । सुख सम्पत्ति नानाविधि पावहिं ।।

प्रेम वृद्धि के लिए

सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीती।।

सुख प्राप्ति के लिए

सुनहि विमुक्त बिरत अरू विबई। लहहि भगति गति संपति नई।।

शास्त्रार्थ में विजय पाने के लिए

तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।।

विद्या प्राप्ति के लिए

गुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई। अलपकाल विद्या सब आई।।

ज्ञान प्राप्ति के लिए

छिति जल पावक गगन समीरा। पंचरचित अति अधम शरीरा।।

विपत्ति में सफलता के लिए

विपत्ति में सफलता के लिए राजिव नयन धरैधनु सायक। भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।।

दरिद्रता दूर करने हेतु

अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

अकाल मृत्यु से बचनें के लिए

नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट। लोचन निज पद जंत्रित प्रान केहि बात।।

ईश्वर से क्षमा मागनें के लिए

अनुचित बहुत कहेउं अग्याता। छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।।

ऋद्धि सिद्ध की प्राप्ति के लिए

साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहि सिद्धि अनिमादिक पाएं।।

खोई हुई वस्तु पानें के लिए

गई बहारे गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।

जहर को खत्म करनें के लिए

नाम प्रभाऊ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।

पुत्र प्राप्ति के लिए

प्रेम मगन कौशल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।।

परीक्षा में सफलता के लिए

जेहि पर कृपा करहिं जनुजानी। कवि उर अजिर नचावहिं बानी।। मोरि सुधारहिं सो सब भांती। जासु कृपा नहिं कृपा अघाती।।

रोगों से बचनें के लिए

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम काज नहिं काहुहिं व्यापा।।

भूत-प्रेत के के डर को भगानें के लिए

प्रनवउ पवन कुमार खल बन पावक ग्यान धुन। जासु हृदय आगार बसहि राम सर चाप घर।।